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आब मान जाउ


अपने बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए स्मृतिशेष श्री #अनिलचंद्र_ठाकुर ने लिखी थीं ये कुछ पंक्तियाँ...

यह फ़ोटो उनके कटिहार वाले आवास पर लिया गया था, इस समय उनका ब्रेन ट्यूमर का इलाज चल रहा था


ठाकुर जी अपने सभी भाइयों और बहनों के साथ


बायें से श्रीमती लीना झा, श्रीमती मीना झा, श्री बिनोदानन्द ठाकुर, ठाकुर जी स्मृतिशेष श्री अनिलचंद्र ठाकुर और श्री शरतचंद्र ठाकुर 

ठाकुर जी अपनी धर्म पत्नी श्रीमति पूनम ठाकुर के साथ









ठाकुर जी अपने पिता के साथ : यह तस्वीर १९९८ में ली गयी थी जब उनके कटिहार वाले आवास का नीव डाला जा रहा था


ठाकुर जी की कुछ तस्वीरें

स्मृतिशेष श्री अनिलचंद्र ठाकुर 
Late Anilchandra Thakur





Yad ..... یاد ..... याद ...

ये उन दिनों की बात है जब ठाकुर जी परसाहाट कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण  बैंक  में कार्यरत थे  | संचार की सुविधा उतनी पुख्ती नही थी | हर शनिवार को वो अपने गांव समेली आ जाया करते थे अपने परिवार के साथ थोरा समय बिताने केलिए | एक बार उनका आना संभव न हो पाया था, तो घर वालों को   उनकी बड़ी चिंता हो रही थी और ठाकुर जी को भी उनके घरवालो की याद आ रही थी | घर से उनके छोटे  भाई उनसे मिलने परसाहाट पहुंचे, ठाकुर जी अपने भाई को अकसमात  देख कर बहोत खुश हुए | जब उनके भाई लौट रहे थे ,तो  उन्होंने अपने भाई को एक लिफाफा अपनी पत्नी के लिए दिया| उस लिफाफे में ये कविता उन्होंने अपनी पत्नी को लिखी थी|
ठाकुर जी को हमारी सहृदय श्रध्धांजलि !!!!
'''याद''


یہ ان دنوں کی بات ہے جب ٹھاکر جی پرساهاٹ کوشی علاقائی دیہی بینک میں ملازم تھے | مواصلات کی سہولت اتنی پكھتي نہیں تھی | ہر ہفتہ کو وہ اپنے گاؤں سمےلي آ جایا کرتے تھے اپنے خاندان کے ساتھ تھورا وقت خرچ کیلئے | ایک بار ان کا آنا ممکن نہ ہو پایا تھا ، تو گھر والوں کو ان کی بڑی فکر ہو رہی تھی اور ٹھاکر جی کو بھی ان کے گھروالو کی یاد آ رہی تھی | گھر سے ان کے چھوٹے بھائی ان سے ملنے پرساهاٹ پہنچے ، ٹھاکر جی اپنے بھائی کو اپسمت دیکھ کر بهوت خوش ہوئے | جب ان کے بھائی واپس آ رہے تھے ، تو انہوں نے اپنے بھائی کو ایک لفافے اپنی بیوی کے لئے دیا | اس لفافے میں یہ آیت انہوں نے اپنی بیوی کو لکھا تھا |

AnilChandra Thakur

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WE ARE THE PUPPETS EVERY PART OF OUR BODY TIED WITH STRINGS THAT MAKES US DANCE JUMP AND DO AS THE FINGER OF THE PUPPETEERS POSES ACTUALLY WE ARE WOODS- LIFELESS, MOTIONLESS, AND VOICELESS ! --- FROM THIS BOOK .....
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English Novel "THE PUPPET" written by ANILCHANDRA THAKUR published by Google-Books USA .=:))